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लूसी तागे

सहयोगी वरिष्ठ डिजाइनर
वस्त्र एवं परिधान डिज़ाइन

डिज़ाइनर | फैशन शिक्षा विशेषज्ञ | शोधकर्ता | शिक्षिका


सुश्री लूसी तागे एक प्रतिष्ठित डिज़ाइनर, फैशन शिक्षा विशेषज्ञ, शोधकर्ता एवं शिक्षिका हैं। अरुणाचल प्रदेश के ज़ीरो
स्थित मुदांग-तागे ग्राम की मूल निवासी सुश्री लूसी ने अपने व्यावसायिक जीवन का प्रारम्भ एक फैशन डिज़ाइनर के
रूप में किया। उन्होंने अपने स्वयं के डिज़ाइन लेबल की स्थापना की तथा "हिल्स विल फिल” की परिकल्पना, डिज़ाइन
एवं निर्देशन किया, जो अरुणाचल प्रदेश के स्वदेशी वस्त्रों को समर्पित प्रारम्भिक रनवे प्रस्तुतियों में से एक थी।
अपने नवोन्मेषी शो निर्देशन तथा विशिष्ट नाटकीय रनवे कोरियोग्राफी के लिए सुविख्यात सुश्री लूसी ने 'इंटरनेशनल
टूरिज़्म मार्ट’ तथा अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित 'स्टेटहुड डे' समारोहों के लिए भी फैशन प्रस्तुतियों की
परिकल्पना एवं कोरियोग्राफी की।


नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT), कन्नूर से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त वह वर्तमान में
NIFT, बेंगलुरु में डॉक्टरेट शोधरत हैं। उनका शोध अरुणाचल प्रदेश की अपातानी जनजाति की पारंपरिक परिधान
संस्कृति का अध्ययन परिधान, शरीर तथा भौतिक संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में करता है। उन्होंने मणिपाल स्थित मणिपाल
स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग (MAHE) के डिज़ाइन विभाग में सहायक प्राध्यापक (सीनियर स्केल) के रूप में
स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर अध्यापन किया है।


डिज़ाइन शिक्षा एवं व्यावसायिक अभ्यास में एक दशक से अधिक के अनुभव के जा, सुश्री लूसी ने अनेक प्रतिष्ठित
शैक्षणिक मंचों पर अपने शोध प्रस्तुत किए हैं। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट एंड डिज़ाइन (IICD), जयपुर;
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे का इंडस्ट्रियल डिज़ाइन सेंटर (IDC); पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी,
कोयंबटूर; तथा क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, एनसीआर सम्मिलित हैं, जहाँ उन्होंने स्वदेशी ज्ञान परम्पराओं एवं सांस्कृतिक
निरंतरता पर वैश्विक विमर्श में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने भूटान साम्राज्य के डी-सूंग स्किलिंग प्रोग्राम के
अंतर्गत परिधान उत्पादन, पैटर्न निर्माण, गारमेंट कंस्ट्रक्शन तथा उद्योगोन्मुख विनिर्माण प्रक्रियाओं के क्षेत्र में मास्टर
ट्रेनर के रूप में भी अपनी सेवाएँ प्रदान की हैं।


उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक मान्यता प्राप्त हुई है। उनके शोध-पत्र रीफैशनिंग फ्यूचर्स 2026,
जिसकी मेज़बानी यूनाइटेड किंगडम स्थित नॉटिंघम स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन, नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी, द्वारा की
जा रही है, तथा टेक्सटाइल्स + फैशन सिम्पोज़ियम 2026, जिसकी मेज़बानी यूएनएसडब्ल्यू आर्ट एंड डिज़ाइन,
सिडनी, ऑस्ट्रेलिया द्वारा की जा रही है, में प्रस्तुति हेतु स्वीकृत किए गए हैं। यह स्वदेशी परिधान प्रणालियों, भौतिक
संस्कृति तथा सांस्कृतिक स्थिरता के क्षेत्र में उनके शोध की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
अपने जीवन-दर्शन “सीखें - सिखाएँ - फिर सीखें : निरंतर विकसित होती चेतना और साझा होता विकास” से प्रेरित
होकर सुश्री लूसी का मानना है कि यद्यपि परिणाम महत्त्वपूर्ण होते हैं, किन्तु वास्तविक रूप से डिज़ाइनरों का निर्माण,
समुदायों का सशक्तिकरण तथा संस्कृतियों का संरक्षण प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव होता है। उनका शैक्षणिक
दृष्टिकोण डिज़ाइन अनुसंधान को सामग्री अन्वेषण, शिल्प परम्पराओं, सतत विकास तथा नवाचार के साथ समन्वित
करता है। वे डिज़ाइन शिक्षा, अंतर्विषयी अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने के साथ-साथ डिज़ाइन
के माध्यम से भारत की समृद्ध स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं समकालीन पुनर्सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता
को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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